भारत-जापान के बीच ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में बड़ा समझौता, ACME करेगा ग्रीन अमोनिया और मेथनॉल की आपूर्ति

भारत-जापान ग्रीन हाइड्रोजन समझौता और ACME Group की ग्रीन अमोनिया व ग्रीन मेथनॉल आपूर्ति

ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में भारत की बड़ी उपलब्धि: ACME Group ने जापानी कंपनियों के साथ किए ऐतिहासिक समझौते

भारत ने वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत की ACME Cleantech Solutions Private Limited (ACME Group) ने जापान की प्रमुख कंपनियों IHI Corporation और Mitsubishi Gas Chemical Company, Inc. के साथ क्रमशः ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

ये समझौते नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किए गए। इन्हें भारत के National Green Hydrogen Mission के तहत स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, उपयोग और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मुख्य बातें

  • ACME Group जापान की IHI Corporation को प्रति वर्ष 4.05 लाख टन ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति करेगा।
  • Mitsubishi Gas Chemical Company के साथ 10 वर्षों का ग्रीन मेथनॉल आपूर्ति समझौता किया गया है।
  • ACME अपने पारादीप संयंत्र से प्रतिवर्ष 1 लाख टन ग्रीन मेथनॉल की आपूर्ति करेगा।
  • ACME Group को SIGHT Programme के तहत प्रतिवर्ष 3.70 लाख टन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है।
  • भारत सरकार ने National Green Hydrogen Mission के लिए 19,744 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया है।
  • इन समझौतों से भारत और जापान के बीच स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

ACME Group और जापानी कंपनियों के बीच क्या समझौता हुआ?

National Green Hydrogen Mission के अंतर्गत ACME Group ने जापान की दो प्रमुख कंपनियों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते किए हैं।

पहले समझौते के तहत ACME Group जापान की IHI Corporation को प्रतिवर्ष कुल 4,05,000 टन यानी 405 kTPA ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति करेगा।

इस परियोजना को जापान की Contract for Difference (CfD) योजना का समर्थन प्राप्त है। जापान के Ministry of Economy, Trade and Industry द्वारा संचालित यह व्यवस्था कम कार्बन वाले अमोनिया के आयात को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए मूल्य समर्थन प्रदान करती है।

इससे ग्रीन अमोनिया की दीर्घकालिक खरीद को बढ़ावा मिलने के साथ परियोजना की व्यावसायिक स्थिरता को भी मजबूती मिल सकती है।

ग्रीन मेथनॉल के लिए 10 वर्षों का समझौता

ACME Group ने जापान की Mitsubishi Gas Chemical Company, Inc. के साथ ग्रीन मेथनॉल की आपूर्ति के लिए 10 वर्षों का समझौता किया है।

इस समझौते के अंतर्गत ACME अपने ओडिशा स्थित पारादीप संयंत्र से प्रतिवर्ष 1,00,000 टन यानी 100 kTPA ग्रीन मेथनॉल की आपूर्ति करेगा।

यह परियोजना वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों के अनुरूप विकसित की जा रही है। ग्रीन मेथनॉल को विशेष रूप से समुद्री परिवहन क्षेत्र के लिए एक संभावित स्वच्छ ईंधन माना जाता है।

परियोजना को यूरोपीय Renewable Fuels of Non-Biological Origin आवश्यकताओं तथा International Maritime Organization के स्वच्छ समुद्री ईंधन मानकों के अनुरूप तैयार करने की योजना है।

National Green Hydrogen Mission क्या है?

भारत सरकार ने जनवरी 2023 में National Green Hydrogen Mission को मंजूरी दी थी। इस मिशन के लिए कुल 19,744 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है।

मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इससे बनने वाले स्वच्छ ईंधनों के उत्पादन, उपयोग तथा निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

इस मिशन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:

  • भारत में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देना
  • जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना
  • औद्योगिक क्षेत्रों के कार्बन उत्सर्जन को कम करना
  • स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना
  • ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव के लिए वैश्विक निर्यात बाजार विकसित करना
  • भारत में नई स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना

SIGHT Programme की क्या भूमिका है?

National Green Hydrogen Mission के अंतर्गत Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition यानी SIGHT Programme शुरू किया गया है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। उत्पादन क्षमता का आवंटन Solar Energy Corporation of India द्वारा पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।

ACME Group को SIGHT Programme के तहत प्रतिवर्ष 3,70,000 टन यानी 370 kTPA उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है। यह क्षमता जापान के साथ किए गए निर्यात-केंद्रित समझौतों के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है।

ग्रीन अमोनिया क्या है?

ग्रीन अमोनिया का उत्पादन मुख्य रूप से Renewable Energy से तैयार किए गए ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करके किया जाता है।

यदि ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लिए आवश्यक बिजली सोलर, विंड या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त होती है, तो इससे पारंपरिक अमोनिया उत्पादन की तुलना में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।

ग्रीन अमोनिया का संभावित उपयोग इन क्षेत्रों में किया जा सकता है:

  • कम कार्बन वाले उर्वरकों के उत्पादन में
  • समुद्री जहाजों के स्वच्छ ईंधन के रूप में
  • ग्रीन हाइड्रोजन के परिवहन और भंडारण में
  • औद्योगिक ऊर्जा स्रोत के रूप में
  • बिजली उत्पादन और ऊर्जा भंडारण में

ग्रीन मेथनॉल क्या है?

ग्रीन मेथनॉल एक कम कार्बन वाला ईंधन है, जिसका उत्पादन Renewable Energy आधारित ग्रीन हाइड्रोजन और सतत स्रोतों से प्राप्त कार्बन का उपयोग करके किया जा सकता है।

इसे समुद्री परिवहन क्षेत्र में पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों के संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। दुनिया की कई Shipping Companies कम उत्सर्जन वाले ईंधनों की ओर बढ़ रही हैं, जिससे भविष्य में ग्रीन मेथनॉल की मांग बढ़ सकती है।

इसके संभावित उपयोग हैं:

  • समुद्री जहाजों के ईंधन के रूप में
  • रासायनिक उद्योग में कच्चे माल के रूप में
  • कम कार्बन वाले औद्योगिक ईंधन के रूप में
  • स्वच्छ ऊर्जा भंडारण और परिवहन में

भारत-जापान स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को मिलेगी मजबूती

इन समझौतों को भारत और जापान के बीच बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

जापान को कम कार्बन वाले ईंधनों की स्थिर और दीर्घकालिक आपूर्ति प्राप्त हो सकेगी, जबकि भारत के लिए ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के नए अंतरराष्ट्रीय बाजार विकसित हो सकते हैं।

इन समझौतों से भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में निवेशकों का विश्वास बढ़ने और स्वच्छ ईंधनों की दीर्घकालिक मांग सुनिश्चित होने की संभावना है।

भारत के ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र के लिए समझौते क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ACME Group और जापानी कंपनियों के बीच हुए ये समझौते कई कारणों से महत्वपूर्ण हैं।

पहला, इनसे भारतीय ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के लिए एक दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय बाजार तैयार होगा।

दूसरा, ये समझौते संकेत देते हैं कि भारत का ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र अनुसंधान और प्रारंभिक परियोजनाओं से आगे बढ़कर व्यावसायिक स्तर की ओर बढ़ रहा है।

तीसरा, इससे भारत में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता, Renewable Energy Projects, Electrolyser Technology, Storage Infrastructure और Export Facilities के विकास को गति मिल सकती है।

इसके साथ ही भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है।

सोलर एनर्जी की क्या भूमिका होगी?

ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में सोलर और विंड एनर्जी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लिए Electrolyser की सहायता से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। यदि इस प्रक्रिया में उपयोग होने वाली बिजली सोलर या अन्य Renewable Energy Sources से आती है, तो उत्पादित हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन कहा जाता है।

भारत में बड़े स्तर पर उपलब्ध सौर ऊर्जा क्षमता ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की लागत कम करने और बड़े उत्पादन संयंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस कारण आने वाले वर्षों में बड़े Solar Parks, Wind-Solar Hybrid Projects और Green Hydrogen Production Plants के बीच मजबूत संबंध देखने को मिल सकता है।

निष्कर्ष

ACME Group द्वारा जापान की IHI Corporation और Mitsubishi Gas Chemical Company के साथ किए गए ग्रीन अमोनिया तथा ग्रीन मेथनॉल आपूर्ति समझौते भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।

इन समझौतों से भारत के National Green Hydrogen Mission को गति मिलने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भारतीय स्वच्छ ईंधनों की पहुँच बढ़ने और भारत-जापान ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल की बढ़ती वैश्विक मांग भारत के Renewable Energy Sector के लिए निवेश, तकनीकी विकास, निर्यात और रोजगार के नए अवसर तैयार कर सकती है।

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